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आयुषवेद

शुद्ध आयुर्वेद की सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए…

हमारे बारे में

आयु्षवेद परिवार ईश्वर से प्रार्थना करता है कि अस्वस्थ लोग शीघ्र स्वस्थ हो जाएं। उनके जीवन से औषधियों की आवश्यकता समाप्त हो जाए। आयुषवेद परिवार नहीं चाहता कि कोई भी बीमार रहे व उसे औषधियां लेनी पड़ें। आयुषवेद परिवार व्यापारिक संस्थान न हो कर एक सेवाभावी स्वयंसेवी समूह है जो कि आपको मात्र लागत मूल्य पर औषधियां उपलब्ध कराता है। हमारे परिवार द्वारा निर्मित औषधियां बाजार से अत्यंत कम मूल्य, गुणवत्ता में शुद्ध व मानकों पर सर्वोच्च होती हैं। सम्पर्क :मोबाइल - 09867335449 (हुमा नाज़,प्रबंध निदेशिका) E-mail : help@aayushved.com

मोटापानाशक(Anti obesity) सैट

motaदुबला पतला और छरहरा शरीर जब खाने-पीने की गड़बड़ी, व्यायाम का न करना, दिनचर्या की अनियमितता या हार्मोनल असंतुलन के कारण धीरे धीरे मोटा होने लगता है तो बहुत सारी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। मोटापा अचानक हो जाने वाली परेशानी नहीं है। स्त्री पुरुषों में अलग अलग अंगों पर चर्बी अपनी जगह बनाने लगती है। पारिवारिक जीवन से लेकर सामाजिक जीवन और नौकरी आदि में लोग मजाक बनाने लगते हैं जबकि मरीज की हालत तो बेचारा वह ही जानता है कि उस पर क्या बीत रही है। पति-पत्नी के शारीरिक संबंधों के बीच में भी मोटापा एक बड़ी बाधा बन जाता है। मोटी स्त्रियों के गर्भ धारण में भी कई बार इस कारण से परेशानी होती है। आजकल मेडिकल साइंस की तरक्की के साथ लेपोसक्शन जैसी सर्जिकल विधियां विकसित हो चुकी हैं लेकिन ये खतरनाक और अत्यंत मंहगी होती हैं। यदि मरीज के शरीर से अधिक चर्बी को एक साथ निकाल दिया जाए तो मौत तक हो सकती है, दूसरी बात कि यह प्रक्रिया इतनी खर्चीली है कि साधारण आदमी इसके बारे में सोच भी नहीं सकता। आयुर्वेद में इस समस्या का सीधा उपचार है जो कि शरीर में बन चुकी अनावश्यक चर्बी को पिघलाना शुरू करता है और धीरे-धीरे पसीने, मल, मूत्र से बाहर कर देता है। इस तरह से शरीर का निश्चित अनुपात(Ratio) में कसाव बना रहता है और अंगों में न तो ढीलापन आता है न ही त्वचा पर झुर्रियां आती हैं। इस सैट की औषधियों के प्रयोग से शरीर में दोबारा फुर्ती का एहसास होने लगता है और यदि मरीज अपनी दिनचर्या में थोड़ा व्यायाम जोड़ लेता है तो जल्दी ही लाभान्वित होता है। इस सैट में तीन औषधियां है-

एण्टीओबेसिटी कैप्सूल: आरोग्यवर्धिनी वटी 100 मिग्रा. + हरड़ घनसत्व 100 मिग्रा. + विजयसार घनसत्व 100 मिग्रा. + मेदोहर गुग्गुल 100 मिग्रा. + विडंग घनसत्व 100 मिग्रा. इन पांच अत्यंत प्रभावशाली मेदनाशक घटकों को मिला कर बनाए गये इस कैप्सूल का प्रभाव तत्काल ही दिखाई देने लगता है।

एण्टीओबेसिटी टैबलेट: त्रिमूर्ति रस 200 मिग्रा. + मेदोहर विडंगादि लौह 200 मिग्रा.+ शिलाजीत 100 मिग्रा. को मिला कर टैबलेट के रूप में बने इस योग का असर इस सैट में अत्यंत महत्त्वपूर्ण तरीके से दिखाई देता है।

एण्टीओबेसिटी चूर्ण: 100 ग्राम चूर्ण में विजयसार 20 ग्राम + त्रिकुट 20 ग्राम + चित्रक 10 ग्राम  + वायविडंग 10 ग्राम  + सैंधव नमक 10 ग्राम + चव्य 10 ग्राम + सनाय 20 ग्राम एक लम्बे अनुभव के आधार पर निर्धारित करा गया है जो कि सभी तरह के मरीजों को अनुकूल रहता है। इसके प्रयोग से पेट साफ़ रहता है और नई चर्बी का निर्माण बंद होकर पुरानी चर्बी का पिघलना शुरू हो जाता है।

इस सैट की औषधियों को एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद डाल कर सेवन करने से मात्र एक माह में परिणाम दिखाई देने शुरू हो जाते हैं किन्तु स्थायी और अपेक्षित परिणाम के लिये तीन से छह माह तक लेना चाहिये क्योंकि जिस तरह से चर्बी धीरे-धीरे बनी थी उसी तरह पिघल कर शरीर से मल-मूत्र व पसीने से बाहर जाने में भी समय लेती है। मरीज के पसीने से आने वाली दुर्गंध की समस्या इस सैट के सेवन से अपने आप ही समाप्त हो जाती है।

उत्पादन मूल्य :  1920 रु./एक माह


वीर्य में शुक्राणुओं की कमी(Oligospermia) और Motality कम होना(Necrospermia)

संतान पैदा करने के लिए पुरुष के वीर्य(semen) में जब पर्याप्त संख्या में सक्रिय और स्वस्थ शुक्राणु(sperm) रहते हैं तब ही स्वस्थ स्त्री के डिम्ब(Ovum) के संयोग से गर्भधारण होता है। स्वस्थ पुरुष के वीर्य में सामान्यतः एक मि.ली. वीर्य में 10-12 करोड़ से अधिक शुक्राणु होने चाहिये अथवा 80 प्रतिशत या इससे अधिक शुक्राणु स्वस्थ व सक्रिय होने चाहिये। हालांकि ये सत्य है कि गर्भ के हेतु सिर्फ़ एक ही शुक्राणु काम आता है बाकी बचे हुए मर जाते हैं लेकिन यह संख्या गर्भधारण की संभावना को मजबूत करती है। शुक्राणुओं की संख्या में कमी के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे कि -
शुक्रवाहिनी नलिकाओं में अवरोध, अण्डकोषों का थैली में न उतरना, मानसिक रूप से हमेशा परेशान रहना, जननांगों पर चोट लगना, अत्यधिक गर्म वातावरण जैसे बायलर आदि में काम करना, आग के पास रह कर काम करना, लम्बे समय तक बुखार से ग्रस्त रहना, pox और mumps जैसी बीमरियों से पीड़ित होना, अत्यधिक साइकिल या रिक्शा चलाना, अत्यधिक हस्तमैथुन करना, अण्डग्रन्थि के रोग, हार्मोनल गड़बड़ियो के कारण, विटामिन “ई” की कमी होना, टी.बी. गोनोरिया या सिफ़लिस जैसी बीमारियां, अत्यधिक रूखे, खट्टे, तीखे, गर्म, मसालेदार तथा नशीले पदार्थों का सेवन करना आदि।
वीर्य में पर्याप्त संख्या में शुक्राणु हों लेकिन गतिहीन, मंदगति या मरे हुए हों तो भी गर्भधारण की संभावना कम ही रहती है। यदि वीर्य में शुक्राणु हों ही न तो ये स्थिति मात्र एक प्रतिशत संभावना की होती है कि किसी चिकित्सा से लाभ हो, इस स्थिति को Azospermia कहा जाता है। आयुर्वेद में पुष्पधन्वा रस, गोक्षुरादि चूर्ण, सिद्ध मकरध्वज आदि कई ऐसी चमत्कारिक दिव्य औषधियां हैं जिनका प्रभाव ऐसे रोगों पर बड़ा ही आश्वर्यजनक रहता है। आयुषवेद परिवार के अनुभवी जानकारों ने इन बीमारियों के लिये एक सैट बनाया है जिसका विवरण निम्नलिखित है।

स्पर्म बूस्टर चूर्ण : गोखुरू, शतावर, कौंच बीज, गंगेरन, बला, तालमखाना, मिश्री इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर बना, सुबह शाम पांच-पांच ग्राम सेवन करना है।

स्पर्म बूस्टर कैप्सूल : अश्वगंधा चूर्ण 450 मिग्रा. + मुलैहठी चूर्ण 150 मिग्रा. + गोक्षुरादि चूर्ण 90 मिग्रा. + सिद्ध मकरध्वज 40 मिग्रा. + पुष्पधन्वा रस 40 मिग्रा.+ प्रवाल पिष्टी 15 मिग्रा.  + मोती पिष्टी 5 मिग्रा. । इस कैप्सूल को गुठली निकाले खजूर पका कर तैयार दूध से लेना है।

स्पर्म बूस्टर टैबलेटस्वर्णबंग, शतावर, अश्वगंधा, मूसली आदि शुक्रवर्धक औषधियों से बनाई इस टैबलेट को दिन में दो बार बाकी दवाओं के साथ लेना है।

इस कीमती उपादानों से निर्मित सैट के तीन माह सेवन से चमत्कारिक लाभ अनुभव में आया है और इससे बहुत सारे मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।

उत्पादन मूल्य : 4300 रु./एक माह

मन तो है लेकिन लिंग में उत्तेजना न आना (Erectile dysfunction)

foolअक्सर देखा गया है कि जो लोग हस्तमैथुन(masturbation), गुदा मैथुन(anal sex) और बहुमैथुन आदि जैसे कर्मों में लिप्त रहते हैं धीरे-धीरे कुछ समय बाद उनके लिंग में शिथिलता आने लगती है, लिंग की इस सुस्ती के कारण मन में सम्भोग करने जैसा विचार होने और परिस्थिति भी होने के बावजूद जब तक लिंग में पूरी उत्तेजना आकर कड़ापन नहीं आ जाता किसी भी पुरुष द्वारा सम्भोग कर पाना संभव ही नहीं है। ऐसी स्थिति में पुरुष को बहुत लज्जित होना पड़ता है और घरेलू जीवन का सत्यानाश होने की नौबत आ जाती है। पुरुष के शरीर की संरचना ऐसी है कि बिना उत्तेजना के सम्भोग करना असम्भव है जबकि स्त्री को ईश्वर ने ऐसा बनाया है कि यदि उसे कामोत्तेजना न भी हो तब भी उसके साथ सहवास करा जा सकता है।
मूर्ख लोग हस्तमैथुन और गुदामैथुन को सही ठहराते हैं उनकी दी हुई गलत शिक्षाओं के भ्रम में फंस कर लोग अपना सत्यानाश कर लेते हैं। कुदरती तौर पर पुरुष जननांग को ईश्वर ने ऐसा बनाया है कि वह स्त्री की योनि के साथ संसर्ग करके संतान उत्पन्न कर सके जिसके लिये  विचारों के तालमेल से हार्मोन उत्पन्न होते हैं जिनकी रक्त के संचार और यौनांग पर ऐसी क्रिया होती है कि पर्याप्त कड़ापन आ जाता है और एक निश्चित समय तक घर्षण के बाद वीर्यपात होने से स्त्री-पुरुष दोनो को मानसिक व शारीरिक संतुष्टि भी होती है, यही क्रिया संतान पैदा करके मानव वंश को आगे बढ़ाने की बुनियाद है। हाथ की कठोर पकड़ अथवा गुदा की कसी हुई मांसपेशियों के साथ वहां मौजूद दूषित मल आदि के प्रभाव में आकर धीरे-धीरे ऐसी स्थिति बनने लगती है कि व्यक्ति का वीर्यपात बहुत जल्दी होने लगता है और लिंग में शिथिलता आ जाती है। मानसिक धरातल पर विचार करें तो कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता कि वह एक घंटे तक हस्तमैथुन करे लेकिन वह स्त्री के साथ सम्भोग अधिकतम समय तक करना चाहता है। हस्तमैथुन की मानसिक स्थिति स्थायी होकर मस्तिष्क में जड़ पकड़ती जाती है और जब ऐसा पुरुष सम्भोग करता है तो मन की स्थिति तुरंत ही वीर्यपात करा देती है क्योंकि उसके मन-मस्तिष्क व शरीर को इस बात का अभ्यास हो चुका होता है कि जल्दी से जल्दी वीर्यपात करके मानसिक-शारीरिक संतुष्टि चाहिये लेकिन स्त्री के साथ होने पर मन की स्थिति बदल नहीं पाती और बस सम्भोग असफल हो जाता है। पुरुष वीर्यपात करके संतुष्ट हो जाता है लेकिन स्त्री संतुष्ट नहीं हो पाती। धीरे-धीरे लिंग में बिना कड़ापन आए ही मन में आए विचारों से वीर्यपात होने लगता है। इस स्थिति से परेशान रोगी वैद्यों हक़ीमों के चक्कर में पड़ कर अपना धन और स्वास्थ्य दोनो बर्बाद कर लेते हैं।
आयुषवेद परिवार ने इस समस्या के हल के लिये बहुमूल्य खनिज द्रव्यों तथा दुर्लभ जड़ी बूटियों को लेकर एक ऐसा सैट बनाया है जो कि लिंग की शिथिलता को दूर करके सम्भोग के मनोरथ को पूरा करके घरेलू संबंधों का नाश होने से रोकता है और रोगी को स्त्री के सामने लज्जित नहीं होना पड़ता है। इस सैट में निम्न तीन तत्काल फलदायी औषधियां हैं –

शिथिलता नाशक कैप्सूल

स्वर्ण भस्म, सिद्ध मकरध्वज, अभ्रक भस्म, बंग भस्म, अकरकरा, कुचला, कौंच, जायफल,मूसली, जावित्री, सालम पंजा, लोहबान सत्वआदि जैसे मूल्यवान उपादानों के संयोग से बने इस कैप्सूल में किसी नशीले या तीव्र उत्तेजक पदार्थ का प्रयोग नहीं करा जाता है।

शिथिलता नाशक टैबलेट :-

जावित्री, शतावर,सालम पंजा, जुंदरवेस्तर, सफ़ेद मूसली, गोखरू, शिलाजीत, अश्वगंधा आदि जैसी मूल्यवान वनस्पतियों के घनसत्वों से तैयार करी गयी ये टैबलेट इस सैट के प्रभाव में अधिक तेजी ला देती है।


शिथिलता नाशक आइंटमेन्ट :-

मालकांगनी, अकरकरा, अश्वगंधा, जायफल, लौंग, कूठ, दालचीनी तथा कुचला आदि उत्तेजक गुण से सुसज्जित वनस्पतियों के प्रभाव को मलहम के रूप में उपस्थित करा गया है।

B-virgin(बी-वर्जिन) यानि स्त्री की ढीली योनि में कुंवारेपन जैसा कसाव

lotus1lotus2स्त्री और पुरुष जब सहवास को आनंद के लिये करते हैं तो आवश्यक है कि दोनो को पूरी संतुष्टि हो। यदि पुरुष का अंग छोटा, कमजोर, पतला और मुरदार सा है या मात्र कुछ ही क्षण में वीर्यपात हो जाता है यानि शीघ्रपतन(premature ejaculation) से ग्रस्त है और स्त्री के चपटे या बेडौल पिलपिले , ढलके हुए स्तन हों; योनि जहां कि सहवास की क्रिया करी जाती है वह अंग एकदम ढीला, फैला हुआ, चौड़ा हो चुका हो तो ऐसे में सहवास में आनंद तो दूर की बात है यह एक सजा की तरह महसूस होता है क्योंकि घर-संसार या प्रेम संबंधों को निभाने में ऐसे पल आते ही हैं। ऐसे में स्थिति ये हो तो दोनो के लिये ये किसी दुर्भाग्य से कम नहीं होता।

जब कम उम्र में किशोर लड़की बड़ी उम्र के अधिक बड़े और भारी-भरकम आकार के लिंग वाले पुरुष के साथ सम्भोग करे, बार बार सम्भोग करना, योनि में फ़ालिज मार जाना यानि कि पैरालिसिस(paralysis) हो जाना, खान-पान और रहन सहन के अनेकों दोष, हस्तमैथुन की बुरी आदत आदि अनेक कारणों से ऐसी स्थिति बनी रहती है कि स्त्री का यौनांग ढीला,पिलपिला और लिजलिजा सा बना रहता है जिसमें कभी कभी दर्द भी होता है और लिकोरिया की समस्या(योनि से सफ़ेद या लाल पानी आना) भी बनी रहती है।

आयुषवेद परिवार से जुड़े आदिवासी भाई-बहनों के सैकड़ों पीढ़ियों से आजमाये प्रयोग को हम एक सैट के रूप में आपके सत्यानाश होते संबंधों के लिये लेकर मात्र उत्पादन कीमत पर लेकर प्रस्तुत कर पाए हैं। बहनें इसे निःसंकोच अपना सकती हैं। इस सैट का प्रभाव इतना तेज है कि मात्र तीन चार दिनों में ही स्त्री अपनी योनि में किसी कम उम्र लड़की के अंग वाला कसाव महसूस कर सकती है। इस पंद्रह दिन के सैट को प्रयोग कर लेने से कई महीनों तक कसाव कायम रहता है और साथ ही योनि के अनेक रोग-दोष जैसे दर्द होना, इंफेक्शन होना, लिकोरिया होना, बदबू आना आदि अपने आप ही दूर हो जाते हैं। काम आनंद को जीवन में दोबारा उतारने के लिये यह एक वरदान की तरह से सिद्ध होने वाली औषधियों का सैट है।

एन्टीडायबिटीज़ सैट

Diabetes mellitus

मधुमेह के कारण पैरों में हुए घाव

डायबिटीज़ या मधुमेह जिसे कि साधारण भाषा में सुगर या शक्कर की बीमारी भी कहा जाता है बहुत भयंकर बीमारी मानी जाती है। आजकल ये बीमारी अनेक कारणों से बहुतायत लोगों में पायी जा रही है। इस बीमारी के बढ़ जाने पर होने वाले लक्षण व्यक्ति को इस स्थिति में ला देते हैं कि वह जीते जी भी मरा हुआ सा महसूस करने लगता है। कभी कोई तकलीफ़ तो कभी कोई परेशानी हमेशा कुछ न कुछ लगा ही रहता है। आधुनिक साइंस के अंधभक्तों के दिमाग में एक बात कूट कूट कर बैठा दी जाती है कि अब ये बीमारी उम्र भर ठीक न होगी और जब तक जीवन है दवा खानी होगी। जो जीवन भर लेना पड़े क्या वो सचमुच दवा है या व्यसन ये आप ही विचार करें। आयुर्वेद ने हजारों साल पहले ही इस बीमारी को समझ कर जड़ी-बूटियों और रस-भस्मों के द्वारा इसका उपचार तलाश लिया था लेकिन हमारे देश में तो ये हाल है कि जब सब जगह से निराश हो जाएंगे तब ही आयुर्वेद के पास आएंगे तो क्यों नहीं इस मूर्खतापूर्ण धारणा को तोड़ कर आयुर्वेद को अपनाएं और सदा स्वस्थ रहें।

आयुषवेद परिवार के अनुभवी लोगों ने विशेष कारगर औषधियों को एक साथ लेकर एक सैट बनाया है जिससे कि आप कुछ माह नियमित रूप से लें तो खुद महसूस करेंगे कि लोग आधुनिकता के अंधविश्वास में “इंसुलिन” के कुचक्र में किस तरह उलझ गए हैं। इस सैट में चार शक्तिशाली औषधियां हैं—

बसन्तकुसुमाकर रस:- प्रवाल(मूंगा), चन्द्रोदय, मोती पिष्टी, अभ्रक भस्म, चांदी भस्म, स्वर्ण भस्म, लौह भस्म, नाग(सीसा) भस्म, बंग भस्म जैसी खनिज तथा कस्तूरी और अम्बर जैसी प्राणिज औषधियों से शक्तिपूरित होने के साथ ही इसे अडूसे के रस, हल्दी के रस, कमल के फूलों के रस, मालती के फूलों का रस, केले के कन्द का रस, चन्दन का क्वाथ, शतावरी का रस, गन्ने के रस जैसी अत्यंत प्रभावशाली वनस्पति औषधियों के संयोग से इस औषधि को तैयार करा जाता है। डायबिटीज़(मधुमेह) रोग में इसे जामुन की गुठली के चूर्ण तथा शिलाजीत के अनुपान के साथ दिया जाता है।

यह बलवर्धक, दिल को ताकत देने वाला, उत्तेजक, बाजीकारक तथा रसायन गुण वाला योग है। स्त्री-पुरुषों के जननेन्द्रिय संबंधी रोगों पर इसका विशेष व तत्काल प्रभाव पड़ता है। यह मधुमेह, बहुमूत्र(बार-बार पेशाब आना), नामर्दी, स्त्रियों में प्रदर रोग(लिकोरिया आदि), योनि तथा गर्भाशय के अनेक दोष, वीर्य का पतला होकर बहते रहना, वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होना, वीर्य तथा शुक्राणुओं के अनेक विकार, वीर्य की कमी से होने वाला क्षयरोग, दिल की कमज़ोरी, चक्कर आना, याददाश्त की कमी, दिमागी कमज़ोरी, नींद न आना, बुढ़ापे के कारण होने वाले अधिकांश विकार आदि पर जादुई तरीके से कार्य करता है।
छोटी उम्र में ही हस्त्मैथुन, गुदामैथुन आदि गलत तरीकों से वीर्य के नाश कर लेने अथवा अत्यधिक स्त्री संग कर लेने पर वीर्य में पतलापन आ जाता है(भले ही कोई बाजारू सेक्सोलाजिस्ट कुछ भी कहें लेकिन आप अपने निजी अनुभवों में क्या पाते हैं वह महत्त्वपूर्ण है) ऐसी स्थिति में शीघ्रपतन की बड़ी भयंकर स्थिति पैदा हो जाती है कभी कभी तो स्त्री के बारे में सोच लेने भर से वीर्यपात हो जाता है यानि कि वीर्यवाहिनी नाड़ियां एकदम कमज़ोर हो जाती हैं उनमें वीर्य उपजने के बाद रोक कर रखने की क्षमता का नाश हो जाता है। इस स्थिति में घरेलू जीवन का सर्वनाश होने लगता है।  इस समय बसन्तकुसुमाकर रस का सेवन करने से अण्डकोश, वीर्यवाहिनी शिराओं तथा लिंग को भरपूर शक्ति मिलती है और वीर्यवाहिनी शिराओं में वीर्यधारण की ताकत बढ़ने से शीघ्रपतन की बीमारी का अंत होता है। यह शरीर में रस,रक्तादि सप्तधातुओं की पुष्टि करके ओज, कान्ति, शुक्र की बढोत्तरी करने वाली आयुर्वेद की गौरवशाली औषधि है।

एण्टीडायबिटीज़ टैबलेट: उदुम्बर(गूलर) घनसत्व १०० मि.ग्रा. , गुड़मार ५० मि.ग्रा. , नाय(मामज्जक) घनसत्व १०० मि.ग्रा. , बेलपत्र ५० मि.ग्रा. , जामुन बीज चूर्ण १०० मि.ग्रा. , शिलाजीत ५० मि.ग्रा. , त्रिबंग भस्म ५० मि.ग्रा. में बेलपत्र, गुड़मार, नीम की पत्ती, बबूल की छाल के काढ़े की भावनाएं देकर तैयार करी गयी ये टैबलेट डायबिटीज़ और उसके अनेक उपद्रवों में विशेष लाभप्रद हैं। (५०० मि.ग्रा. की एक टैबलेट में घटकों की मात्रा)
एक-दो गोली चिकित्सक के निर्देशानुसार सुबह नाश्ते के साथ तथा रात को भोजन के साथ पानी से लीजिये।

एण्टीडायबिटीज़ चूर्ण: जामुन बीज का चूर्ण २० ग्राम, नाय(मामज्जक) का चूर्ण २० ग्राम, गुड़मार का चूर्ण २० ग्राम, बेलपत्र का चूर्ण १० ग्राम, नीम की पत्ती का चूर्ण १० ग्राम, मेथीदाना १० ग्राम, बबूल की छाल १० ग्राम (प्रति १०० ग्राम में घटकों की मात्रा) । एक-दो चम्मच चिकित्सक के निर्देशानुसार दोपहर तथा रात को भोजन के बाद जल से सेवन करिये।

एण्टीडायबिटीज़ कैप्सूल: उदुम्बर(गूलर) घनसत्व १०० मि.ग्रा, गुड़मार घनसत्व ५० मि.ग्रा. , बेलपत्र घनसत्व १०० मि.ग्रा. , शिलाजीत ५० मि.ग्रा. , जामुन बीज घनसत्व १०० मि.ग्रा. , यशद भस्म २५ मि.ग्रा. , नाय(मामज्जक) घनसत्व १०० मि.ग्रा. , त्रिबंग भस्म २५ मि.ग्रा. में ताज़ा गिलोय के रस की भावना देकर इस मिश्रण से तैयार कैप्सूल सुबह-शाम एक-दो चिकित्सक के निर्देशानुसार लेने से मधुमेह और मूत्र संबंधी सारे उपद्रव दूर हो जाते हैं।

शक्कर से बने मीठे पदार्थों का त्याग करें, चावल, आलू(सभी कन्द वाले भोज्य पदार्थ), मीठे फल त्याग करें। करेला, जामुन, हरे शाक, खीरा, ककड़ी, जौ, चना आदि का अधिक सेवन करें।

कामशक्ति वर्धक सैट

यदि आप निम्न में से किसी परेशानी से ग्रस्त हैं—

१. मैथुन की इच्छा न होना

२. लिंग में शिथिलता/तनाव ही न आना

३. मैथुन में आनन्द की प्राप्ति न होना

४. मैथुन करते-करते लिंग की उत्तेजना खत्म हो जाना

५. मैथुन के बाद अत्यंत थकावट महसूस करना

६. मधुमेह(डायबिटीज़) के कारण नपुंसकता आ जाना

७. मैथुन शुरू होने से पहले ही स्खलित हो जाना

८. एक बार मैथुन करने के बाद बहुत दिन तक मैथुन न कर पाना

९. अत्यधिक मैथुन के कारण वीर्य का पानी जैसा पतला हो जाना

१०. वीर्य में शुक्राणुओं का कम होना/मरा हुआ होना

सभी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया गया ये सैट आजमाइये, जिसमें हैं तीन बेहद खास दवाएं (1) कामशक्ति केसरी वटी,(2) नपुंसकत्वारि वटी,(3)बसंतकुसुमाकर रस(विशेष)

कामशक्ति केसरी वटी : (साठ गोली यानि १८ ग्राम औषधि का विवरण)

स्वर्ण वर्क – .009 ग्राम           हीराखड़ भस्म- .002 ग्राम     माणिक्य पिष्टी- .002 ग्राम

वैक्रान्त पिष्टी –.002 ग्राम नाग भस्म- .09 ग्राम           कज्जली- .09 ग्राम

रजत(चांदी)भस्म- .093 ग्राम    अभ्रक भस्म- .094 ग्राम      रस सिंदूर- .370 ग्राम

शुद्ध हिंगुल- .370 ग्राम     तालमखाना- .275 ग्राम    सालम मिश्री- .275 ग्राम

लौंग- .275 ग्राम    केशर- .275 ग्राम     सोंठ- .275 ग्राम

जायफल- .275 ग्राम   जावित्री- .275 ग्राम        भांग के बीज- .275 ग्राम

कौंच के बीज- .275 ग्राम    दालचीनी- .275 ग्राम     तेजपात- .275 ग्राम

छोटी इलायची- .275 ग्राम     अकरकरा- .275 ग्राम  सफ़ेद जीरा- .275 ग्राम

ख़ुरासानी अजवायन- .275 ग्राम  पीपल- .275 ग्राम       रूमी मस्तंगी- .275 ग्राम

मालकांगनी- .275 ग्राम     शुद्ध धतूराबीज- .275 ग्राम     शुद्ध बछनाग- .275 ग्राम

लाल बहमन- .275 ग्राम    शुद्ध कुचला- .375 ग्राम    शुद्ध भांग- .375 ग्राम

त्रिफला- .375 ग्राम

नपुंसकत्वारि वटी : (प्रति सौ ग्राम वटी का औषधि विवरण)

जावित्री -  7ग्राम, शतावर – 7ग्राम, सालम पंजा – 7ग्राम, गोखरू- 7ग्राम

तालमखाना – 7ग्राम, जुन्दरवेस्तर – 7 ग्राम, लौंग – 7ग्राम, कर्पूर – 3 ग्राम

शुद्ध कुचला – 7 ग्राम,अश्वगंधा -   ग्राम,शिलाजीत -10 ग्राम,बंग भस्म – 10ग्राम

जायफल – 7 ग्राम, सफ़ेद मूसली – 7 ग्राम

शतावरी, कौंच बीज, गोखरू के काढ़े की भावना देकर तैयार करा गया।

बसंतकुसुमाकर रस : यह मधुमेह(डायबिटीज़),प्रमेह,नपुंसकता तथा वीर्य के विकारों के लिये आयुर्वेद की प्रसिद्ध शास्त्रोक्त औषधि है। हम इसे विशेष शक्तिवर्धक औषधि द्रव्यों के काढ़े की भावनाएं देकर तैयार करते हैं जिससे कि यह विशेष गुणकारी बन जाता है तथा इसका प्रभाव तत्काल ही दिखने लगता है। इसके दो-तीन माह सेवन कर लेने से ऐसा मानिये कि साल भर का स्वास्थ्य का बीमा हो जाता है। बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा दिखाए जा रहे थर्टी या फोर्टी प्लस किस्म की औषधियों की अपेक्षा यह अत्यधिक प्रभावशाली है।

कामोत्तेजक, बल, वीर्य और शक्तिवर्धक व अत्यंत बाजीकारक

ayurveda and life-forceपुष्पधन्वा रस:-  यह औषधि रसायन गुण प्रदान करने के साथ ही कामोत्तेजक, बल, वीर्य और शक्तिवर्धक व अत्यंत बाजीकारक है। इसके नियमित सेवन से वीर्यस्राव(लगातार ही इंद्रिय से चिपचिपा सा पदार्थ निकलते रहता जो कि हस्तमैथुन की अति के कारण हुआ करता है), ध्वजभंग( इंद्रिय का एकदम शिथिल हो कर उत्तेजित ही न होना), शीघ्रपतन( सम्भोग के अवसर पर बिना संतुष्टि हुए ही वीर्य का अतिशीघ्र निकल जाना) आदि लक्षणों में स्थायी लाभ होता है।
एक-एक गोली चिकित्सक के परामर्श से सुबह शाम शहद, मक्खन-मिश्री के साथ लिया जाए।

शुक्राणुओं की कमी

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पूर्णचन्द्र रस:-  यह रसायन औषधि शुक्राणुओं के उत्पत्ति पर प्रभाव डालती है। शुक्राणुओं की नयी रचना के लिये देह की प्रणाली को सहयोग करती है। यह महौषधि शुक्राणुओं के उत्पत्ति क्रम को सुधार कर स्वस्थ शुक्राणु उत्पंन करने में सहायक सिद्ध होती है। यह नपुंसकता, प्रमेह तथा शुक्राणुओं की कमी के लिये दिव्य औषधि है।
एक-एक गोली चिकित्सक के परामर्श से सुबह-शाम मलाई, दूध या शहद से लिया जाए।

सम्भोग की इच्छा न होना

aayushved2कामचूड़ामणि रस:- इस महौषधि के प्रभाव से स्तम्भन(रुकावट) की कमी, सम्भोग की इच्छा न होना, उत्तेजना की कमी आदि जैसे लक्षणों में तत्काल लाभ होता है। यह वीर्य विकारों के लिये भी अत्यंत उपयोगी औषधि है। इसके कुछ समय तक लगातार प्रयोग करने से नपुंसकता में स्थायी तौर पर लाभ होता है।
इसे चिकित्सक के परामर्श से एक या दो गोली सुबह रात्रि मलाई के साथ लिया जाए।

कामोत्तेजना,स्तम्भन(रुकावट) शक्ति में विशेष बढोत्तरी

aayushved3सिद्ध मकरध्वज नं-१ :- मकरध्वज आयुर्वेद का एक अत्यंत गौरवशाली योग है। इसे अनेक रोगों में प्रयोग करा जाता है किन्तु कामोत्तेजना तथा बलवीर्य को बढ़ाने के लिये इसका विशेष प्रयोग होता है। इसके प्रयोग से वीर्य पुष्ट होता है। स्तम्भन(रुकावट) शक्ति में विशेष बढोत्तरी होती है।
इसकी एक रत्ती(१२५ मिग्रा.) मात्रा चिकित्सक के परामर्श से मलाई, मक्खन या शहद के साथ दिन में दो बार लिया जा सकता है।

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