Archive for the ‘दर्द’ Category

Bilateral polycystic kidney की समस्या

Aadab bhai jan, bhai ki medical reports bhej raha hun ham sabhi ko apse bahut sari ashyen hain…

Present Condition:
Bilateral polysystic kidey with cholelithiasis
निम्न लक्षण हैं…….
१.दोनों पैर में सूजन है दाहिने पैर में ज्यादा व पंजे में अधिक है पैर की नसों व उँगलियों में दर्द,कुल्हे तक दर्द.
२.पेशाब रुक रुक कर होता है.कभी कभी पेशाब में जलन अधिक रहती है और जलन गले तक होती है.
३.पीठ में दोनों तरफ दर्द रहता है.बाएँ तरफ दर्द अधिक रहता है.
४.कभी कभी मतली होती है और कभी उलटी भी हो जाती है.
(करीब दस सालों से ये दिक्कत है. कमजोरी बहोत है और वज़न भी करीब ४७ किलो है.)
गुफ़रान सिद्दिकी,इलाहाबाद
प्रिय गुफ़रान भाई, आपके द्वारा भेजे गए पत्र में जो लक्षण और संलग्न रिपोर्ट्स थीं उन्हें जाना समझा। चूंकि जब रोग पुराना हो जाता है तो पुनः स्वास्थ्य आने में समय लगता है। इसलिये चिकित्सा काल में इच्छित परिणाम मे लिये धैर्य रखें। रोगी को निम्न उपचार दें-
१. शतावरी चूर्ण एक चम्मच + मुलैहठी चूर्ण एक चम्मच मिला कर एक कप दूध के साथ सुबह-शाम दें ध्यान रखिए कि दूध गर्म न करें सामान्य ताप पर ही दें।
२. अविपत्तिकर चूर्ण आधा चम्मच भोजन के आधे घंटे पहले जल से दीजिए दिन में दो बार दें।
३. क्षार पर्पटी एक ग्राम + सज्जीखार एक ग्राम + पुननर्वादि गुग्गुलु एक गोली को नींबू शर्बत या शहद के साथ दिन में तीन बार सुबह दोपह शाम को दीजिये(खाली पेट न दें)
४. त्रिफला २ ग्राम + कुटकी एक ग्राम + मुनक्का ३ ग्राम मिला कर मुनक्के को मसल कर बनाए शर्बत के साथ दें(इस शर्बत के स्थान पर हरीतक्यादि क्वाथ दें तो बेहतर परिणाम मिलते हैं)
भोजन में अधिकतम दूध रोटी या दूध चावल का सेवन हितकर है। नमक, तेल, मिर्च, अचार, दही,कुल्थी की दाल,मसूर आदि जैसे गर्म और भारी भोजन का त्याग करें। मांसाहार(अंडे भी) पूरी तरह सख्ती से बंद कर दें यह रोगी के लिए विष के समान है। फलों में पके केले, अनार, नारियल, मोसम्बी, आंवला दे सकते हैं; लौकी, परवल, करेला, कद्दू की सब्जी दीजिये किन्तु ध्यान रहे कि ये सब मसालेदार न हो। सब्जी में देसी घी और जीरे का छौंक दे सकते हैं।

३-४ वर्षों से कमर दर्द से पीड़ित हूँ

आदरणीय डाक्टर साहब,मैं पिछले ३-४ वर्षों से कमर दर्द से पीड़ित हूँ। रात को शरीर पत्थर की तरह कठोर हो जाता है,करवट भी बदली नहीं जाती पीठ गर्म भी रहती है, नीचे पालथी लगा कर नहीं बैठ पाता। उम्र-३५ वर्ष,वज़न-८० किलो है।
रजनीश परिहार,बीकानेर..[राजस्थान]
प्रिय रजनीश जी,आपकी समस्या देख कर सीधे ही औषधि बताने से पूर्व बताना चाहता हूं कि इस तरह की समस्याएं बताते समय यदि मरीज अपना पेशा और दिनचर्या आदि बता दे तो निदान में आसानी होती है आपकी बीमारी को आयुर्वेद में कटिग्रह कहते हैं। लीजिये समाधान प्रस्तुत है-
१. महायोगराज गुग्गुल दो गोली दिन में तीन बार दो चम्मच महारास्नादि क्वाथ से लीजिये
२. दशमूलारिष्ट चार चम्मच दिन में दो बार भोजन के पहले लीजिए
३. लशुनादि वटी एक गोली+ चित्रकादि वटी एक गोली+ हिंग्वादि वटी एक गोली दिन में दो बार भोजन से आधा घंटा पहले लीजिये
४. सैंधवादि तैल + महानारायण तैल की दिन में दो बार मालिश करें व सिंकाई करें
५. व्रहद छागलाद्य घी एक एक चम्मच दिन में दो बार चाटें(यदि ये दवा बाजार में न मिले तो किसी स्थानीय वैद्य से बनवा लें आयुषवेद परिवार इस औषधि को नहीं बनाता है क्योंकि इस औषधि में बकरी का मांस डाला जाता है यदि आप शाकाहारी हों तो इस दवा को न लें)
इस औषदि के स्थान पर आप निम्न योग भी ले सकते हैं: – लहसुन का रस+ अदरख का रस+ गोमूत्र अर्क+ शहद चारों बराबर मात्रा में लेकर कांच की बोतल में भरकर कस कर ढक्कन लगा दें व सात दिन धूप में रखें उसके बाद दो – दो चम्मच दवा बराबर पानी से लीजिये और रात में सोते समय दो चम्मच एरण्ड पाक गर्म दूध से लीजिये।
इस उपचार का सेवन तीन माह तक करिये।

जड़ी-बूटी,एलोपैथी,आयुर्वेदिक,एक्युपंचर सभी किए गए,दोनो पैरोँ मेँ भयंकर दर्द रहता है


सर नमस्कार।मेरी मम्मी की उम्र लगभग 38 साल है।उन्हेँ लगभग 3 साल से दोनो पैरोँ मेँ भयंकर दर्द रहता है,दर्द ऐँड़ी से शुरु होता है फिर सूजन आ जाता है जो पूरे शरीर मेँहो जाता है।नसेँ मुड़ी हुई लगती है।जिस वजह से न चल पाती हैँ न ही उठ पाती हैँ।फिर बुखार आ जाता है।पैरोँ के उँगलियोँ मेँ तथा जोड़ोँ मेँ कोई गाँठ नही है।दर्द के वजह से सूजन जरुर हो जाता है।अभी साल भर से साथ मेँ अगर चलती हैँ तो कमर से कट-कट की आवाज आती है।इलाज मेँ हर प्रकार से जड़ी-बूटी,एलोपैथी,आयुर्वेदिक,एक्युपंचर सभी किए गए हैँ,कोई कहते हैँ गठिया हैँ कोई आर्थराइटिस कोई वात हैँ।समझ मेँ नहीँ आता है क्या है।हम लोग हार चुके हैँ ,क्या मम्मीजी कभी पूरी तरह से ठीक हो पाएंगी ?दवाई मेँ Nimesulide या Diclofenac sodium दिन मेँ 3 बार देना पड़ता है साथ मेँ इंजेक्शन भी। 3 सालोँ से लीवर और किडनी का क्या हाल हुआ होगा ?हम सभी इस बीमारी से अपना आपा खो चुके हैँ क्या करेँ?इस बीमारी की शुरुवात कैसे हुई ये बताना चाहुँगा, बरसात के दिनोँ मेँ खेती सम्भालना पड़ता है मम्मीजी खेत के पानी मेँ 5-6 घंटे तक रही थी।शाम से पैर के पंजो व ऐड़ी मेँ दर्द हुआ फिर सूजन और अभी ये गंभीर स्थिति है।मैँ स्वंय ऐलोपैथी का युवा डाँक्टर हुँ और इस बीमारी से हार चुका हुँ।क्या मम्मीजी पूरी तरह से पहले जैसी ठीक हो जाएँगी ? इसका ईलाज जरुर बताएँ डाँक्टर साहब मैँ आपका जिँदगी भर आभारी रहूँगा।
डाँ॰वीरेँद्र पालके(पी॰एम॰एच॰एम॰)
कवर्धा (छत्तीसगढ़)
प्रिय डा.वीरेन्द्र जी, हिम्मत हार कर बैठ जाने से समस्याएं हल नहीं होती हैं एक चिकित्सक को आखिरी दम तक प्रयत्नशील रहना चाहिये। आपकी माता जी के विषय में आपने जैसा लिखा है कि तमाम उपचार लिये जा चुके हैं, ये लक्षण शत-प्रतिशत वात संबंधी विकार के ही हैं किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आपको सही चिकित्सक नहीं मिले या सही और शुद्ध औषधियां नहीं मिली होंगी; जरा विश्वास रख कर इस उपचार को दीजिए-
१. शुन्ठी गुग्गुल एक गोली + योगराज गुग्गुल एक गोली + महायोगराज गुग्गुल एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से दीजिये।
२. वैश्वारनर चूर्ण तीन ग्राम रात में एक बार गर्म दूध के साथ दीजिए
३. अश्वगंधा चूर्ण तीन ग्राम दिन में दो बार जल से दीजिये।
४. समीरपन्नग रस एक एक गोली दिन में दो बार शहद से दीजिये।
५. रास्नासप्तक क्वाथ तीस मिली. दिन में दो बार दीजिये।
६. बलातेल+ एरण्ड तेल मिला कर इससे सप्ताह में एक बार एनिमा दीजिए।
इस उपचार को तीन माह तक दीजिये और ध्यान रहे कि कब्जियत न होने पाए वैसे तो औषधि व्यवस्था ऐसी है कि ऐसा नहीं होगा किन्तु कई बार रोगी क्रूरकोष्ठी होने पर ऐसा पाया गया है। बासी भोजन से परहेज करें।

दर्द के कारण मेरी पत्नी कंधा हिला तक नहीं सकती…

Respected Vaidya Ji,
I have come to know from your website the advises given by you for various deseased.
My wife is suffering from pain in her left hand joint near shoulder from last about 5-6 months.
She is unable to move her hand according to choices.
The doctor has diagonised that her never has got chocked and this problem is due to improper blood circulation. One small gland is also seen at her left side neck. The fingers of legs are also seems to be very much tight and after acupressure/puncture some relieve is felt.
Alopathic Medicine is being taken by her and physiotheraphy/excersies are also being done. To some sort she is feeling releived from pain whenever she takes pain killer.
We shall be highly obliged for suggesting some Aayushvedic medicine which may be easily available in shops.
With kind regards.
Ramashish Thakur
रामाशीष जी, आपने जो लक्षण लिखे हैं उनके आधार पर बताया जा सकता है कि यह सीधे ही वात का विकार है जिसके कारण ये कष्ट है। आप उन्हें बासी भोजन से परहेज कराएं और निम्न उपचार हेतु औषधियां दें-
१ . वैश्वानर चूर्ण ३ ग्राम रात को एक बार भोजन के बाद दें।
२ . शुण्ठी गुग्गुल दो गोली + अश्वगंधा चूर्ण ३ ग्राम दिन में तीन बार गर्म जल से दीजिये।
३ . रास्ना सप्तक काढ़ा दिन में दो बार दो – दो चम्मच पिलाइये।
४ . प्रभावित अंग को कपड़ें में बालू+ सेंधा नमक + निर्गुंडी जिसे मेउड़ी या सम्हालू भी कहते हैं, की पत्तियां भर कर दिन में तीन बार सेंकिये(यदि पत्तियां न मिलें तो सिर्फ़ बालू व सेंधा नमक से ही सेंकिये)।
इस उपचार को तीन माह तक जारी रखिए पहले ही सप्ताह से आश्चर्यजनक परिवर्तन दिखाई देने लगेगा।

कान की जड़ में सूजन और दर्द रहने लगा है

जनाब डाक्टर साहब
आदाब
लंतरानी नामक उर्दू के ब्लाग पर से आपके ब्लाग पर आया तो बड़ा अच्छा लगा कि आप लोगों की सेवा का काम नेकी समझ कर किये जा रहे हैं। मेरी बेटी की उम्र आठ साल है उसको करीब एक हफ़्ते से दोनो कानों के नीचे यानि कि कान की जड़ में सूजन और दर्द रहने लगा है यहां के डाक्टर ने कुछ अजीब सी बीमारी का नाम बताया और वे कहते हैं कि आपरेशन करना होगा। क्या आयुर्वेद या यूनानी का कोई उपाय है जिससे कि आपरेशन के बिना बच्ची की तकलीफ़ खत्म हो जाए।
मौलाना अज़हर हुसैन कारी, लखनऊ
कारी साहब लंतरानी उर्दू ब्लाग से आप यहां तशरीफ़ लाये और हमें इस क़ाबिल समझा कि हम आपकी बच्ची के लिये कुछ सलाह दे सकें इसके लिये दिल से शुक्रिया। मैं आपकी बच्ची की समस्या को समझ रहा हूं इसे आयुर्वेद में कर्णमूल शोथ कहते हैं। बीमारी के विवरण की गहराई में न जाकर सीधे उपचार पर आता हूं। यूनानी के बारे में तो विशेष जानकारी नहीं रखता हूं अतः आयुर्वेद का निम्न उपचार बच्ची को दें-
१ . साधारण कत्था १० ग्राम + गूगल १० ग्राम + मैनफ़ल १० ग्राम + रेवतचीनी १० ग्राम इन चारों औषधियों को हल्का सा पानी छिड़क कर सिल पर एकदम बारीक पीस लीजिये जब यह लेई की तरह से हो जाए तो इसे कड़ाही में गर्म कर लीजिये। यह सचमुच लेई की तरह हो जाएगी इस मिश्रण को सूजे स्थान के आकार का कपड़ा लेकर उस पर लगा कर उस अंग पर चिपका दें व पानी से बचाएं। यह उपचार अनेक रोगियों पर परीक्षा करा हुआ अत्यंत सफल योग है। मात्र दो या चार दिन में ही आराम हो जाएगा।
२ . आरोग्यवर्धिनी एक गोली सुबह शाम दिन में दो बार पानी से एक सप्ताह तक दीजिये। खाली पेट न दें।
खट्टी व मिर्च-मसालेदार चीजों से परहेज कराएं। बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स आदि न पीने दें।

अंडकोश से जुड़ी हुई नस मोटी व सूजी हुई है

Namaskar Doctor Shahab. Me aapse apni samasya ka samadan chahta ho. sabse pahle me aapko apne bare me batana chahta ho meri aayo 21 year he aur me unmarried ho. meri samsya is prakar he ki mera left andkosh badha huya he jab me use hath se pakar kar dekhta ho tab muje usme moti nas lagti he aur goli badi huyi lagti he pata nahi wo sujan he ya kuch aur, isme dard bhi rahta he yah bhimaari meri lagbag 3 ya 4 saal purani he aur me isme kai desi ilaz le chuka ho mene is par arandi ke patte, kesu ke fool, aur vridivatika vati+do tarah ke tel ka proyog kar chuka ho par koi kash labh nahi hoya, kabhi yah problem jayda ho jaati he to kabhi dard bhi nahi rahta, yah problem jayda bede rahne, bike chalane se jayda hoti he. Please send me the solution for this problem kyoki me is problem ko apni bhivi ke samne nahi jhelna chahta ho. me badi umeed se aapko yah problem bata raha ho please help me.
A. saifi
सैफ़ी जी,आपकी समस्या समझा है जैसा कि आपने लिखा है कि अंडकोश से जुड़ी हुई नस मोटी व सूजी हुई सी प्रतीत होती है वह ज्यादा कुछ नहीं बल्कि किसी हल्के आघात या चोट का परिणाम है जो शायद सायकिल चलाने से या हस्तमैथुन की गलती का नतीजा है(इस बात का बुरा न मानियेगा क्योंकि ये भी एक कारण होता है इस तरह की समस्या का)। आप निम्न उपचार लीजिये-
१ . नित्यानंद रस एक गोली + कांचनार गुग्गुल एक गोली + वृद्धिबाधिका वटी एक गोली दिन में तीन बार अभयारिष्ट के एक चम्मच में बराबर पानी मिला कर लें। यह औषधियां आप कम से कम चालीस दिन तक लीजिये।
२ . त्रिफला चूर्ण + त्रिकुटा चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर एक चम्मच चूर्ण को दो कप पानी में उबाल कर आधा होने पर काढ़ा छान लीजिये व उसमें यवक्षार(जवाखार)+ सेंधानमक मिला कर दिन में दो बार पीजिए। खाली पेट न लें।
गेंहू, पुराना चावल,ज्वार, ताजा मट्ठा,गाय का दूध,हरे शाक जैसे पाचक पदार्थ लीजिये और सायकिल की सवारी,अधिक परिश्रम, मैथुन, दही, उड़द, मिठाई, बासी भोजन से परहेज करिये।

तीन साल से नज़ला की तकलीफ़ है

सर, नमस्ते
मेरी समस्या है कि मुझे पिछले तीन साल से नज़ला की तकलीफ़ है जिसके कारण मैं बहुत परेशान हूं। मैंने बहुत दवाएं ली हैं लेकिन कोई भी आराम नहीं होता जब नजले की समस्या शुरू होती है तो सिर और गर्दन में बहुत दर्द होता है और मेरी आवाज भी बंद हो जाती है ऐसे में इशारों से काम करना पड़ता है। बलगम भी नहीं निकल पाता है खांसी बहुत होती है पूरी-पूरी रात निकल जाती है। मेरी उम्र ३५ साल है। मेरी दूसरी समस्या है कि मुझे अस्थमा(दमा) की समस्या भी शुरू हो गयी है। पिछले चार माह से खांसी होने के साथ ही सांस की भी तकलीफ़ होने लगती है। मैं बहुत कमजोर हो गयी हूं। सर, मैं पैरों से भी विकलांग हूं जिस कारण मैं इधर-उधर जाने में असमर्थ हूं मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका कोई सहारा नहीं है आपके बारे में मेरे एक रिश्तेदार ने बताया था और मैं अपनी समस्या उनसे ही आप तक पहुंचा रही हूं। आपसे उम्मीद है कि आप मेरी समस्या को हल करेंगे मैं आपकी जीवन भर आभारी रहूंगी।
चमनलता
पलवल(हरियाणा)
बहन, आयुषवेद परिवार हर संभव प्रयास करेगा कि आपकी समस्या जल्द से जल्द समाप्त हो जाए। आप निम्न उपचार को पंद्रह दिन तक लीजिये और इस दौरान यदि मांसाहार करती हों तो उसका त्याग करें ताकि समुचित लाभ मिल सके-
१. कफकेतु रस एक गोली + कफचिन्तामणि रस एक गोली को सुबह-दोपहर-शाम अदरक के रस आधा चम्मच व शहद एक चम्मच मिला कर लीजिये।
२ . अभ्रक भस्म एक रत्ती + लौह भस्म एक रत्ती को देसी पान के पत्ते पर शहद लगाएं व दोनो भस्मों को बुरक कर उस पत्ते को चबा कर खा लीजिये लेकिन ध्यान रहे कि एक घंटे तक पानी न पियें। दिन में दो बार इस तरह पान का सेवन करें।
३ . मकरध्वज बटी एक-एक गोली दिन में दो बार सुबह शाम शहद से लीजिये।
इस उपचार को पंद्रह दिन तक लेने पर आपको चमत्कारिक लाभ होगा और स्थायी लाभ के लिये चालीस दिन तक जारी रखें ताकि समस्या दोबारा न हो सके। आयुषवेद परिवार ईश्वर से प्रार्थना करता है कि आप जल्दी से स्वस्थ हो जाएं ताकि आपकी औषधियों की आवश्यकता समाप्त हो जाए।

मायग्रेन का दर्द है

सर नमस्ते,मेरी उम्र २२ साल है और मैं इंजीनियरिंग का छात्र हूं। करीब चार माह से मेरे आधे सिर में ऐसा दर्द होता है जो कुछ समय बाद असहनीय सा होने लगता है, महसूस होता है कि सिर के अंदर रोलर चल रहा है। पेन किलर ले लेने पर दर्द बंद हो जाता है लेकिन फिर कुछ समय बाद दो तीन दिन में शुरू हो जाता है। हमारे फ़ैमिली डाक्टर ने बताया कि यह मायग्रेन का दर्द है। वो पेन किलर्स दवाएं ब्रूफ़ेन आदि भी उन्होंने ही दी हैं क्या आयुर्वेद में स्थायी इलाज है?
राघव आचार्य,टीकमगढ़
राघव जी,आपके फैमिली डाक्टर ने सही बताया है कि यह मायग्रेन (migraine) का दर्द है। यदि यह रोग बढ़ जाए तो सबसे पहले इससे आंखे और फिर कान प्रभावित होते हैं। आप निम्न उपचार लीजिये, पेन किलर्स तात्कालिक लाभ देते हैं स्थायी नहीं अतः उन दवाओं को बंद कर दीजिये-
१ . चंद्रकान्त रस २-२ गोली सुबह-शाम शहद से चाट लीजिये और फिर इसके बाद ऊपर से करीब १५ मिली. पथ्यादि काढ़ा पी लीजिये। खाली पेट दवा न लीजिये।
२ . सुबह खाली पेट शौचादि से निपटने के बाद गर्म जलेबी को दही के साथ नाश्ता करिये।
इस उपचार को लगातार एक माह तक कम से कम लीजिये ताकि स्थायी हल प्राप्त हो सके। अनावश्यक रात्रि जागरण न करें, बासी भोजन न करें, बाजारू ड्रिंक्स से परहेज करें साथ ही अधिक मसालेदार आहार न लें।

सर्वाइकल स्पोन्डिलायटिस हुआ है


आदरणीय डा.साहब,नमस्ते
मैं पिछले कुछ महीनों से गर्दन के पीछे के हिस्से में दर्द व अकड़न महसूस करती हूं। यदि गरदन हिलाने का या घुमाने का प्रयास करती हूं तो दर्द ज्यादा हो जाता है। आपको रिपोर्ट्स भेज रही हूं। बताया गया है कि मुझे सर्वाइकल स्पोन्डिलायटिस हुआ है जबकि एक वैद्य ने मुझे मुख अलग ही नाम बताया था बीमारी का “मनियास्तम्भ” या ऐसा ही कुछ; किंतु मेरे पति ने उनसे इलाज नहीं करवाया कि बिना किसी परीक्षण के क्या ये शक्ल देख कर बीमारी बताएगा,मेरे पति आधुनिक विचारों के हैं। सर्दी के मौसम के कारण शायद ज्यादा तकलीफ़ है। डाक्टर कहते हैं कि गले में पट्टा(कालर) बांधना पड़ेगा। मैं मर जाउंगी लेकिन पट्टा न बंधवाऊंगी। मेरी सहायता करें ताकि आयुर्वेदिक दवा से बीमारी जड़ से समाप्त हो जाए।
अलका रोहिल्ला,आगरा
अलका बहन,आपकी बीमारी को जिस वैद्य ने बताया था वह बिल्कुल सही है उसे आयुर्वेद में “मन्यास्तम्भ” और आधुनिक चिकित्सा में सर्वाइकल स्पोन्डिलायटिस ही कहते हैं,आधुनिकता में आकर अपनी पारंपरिक चिकित्सा का अनादर करना सही नहीं है। लीजिये मैं भी आपको वैसा ही इलाज बता रहा हूं जैसा कि शायद वो वैद्य जी बताते।
१ . धतूरे के बीज १२ ग्राम + रेवंदचीनी ८ ग्राम + सोंठ ७ ग्राम + गर्म तवे पर फ़ुलाई हुई सफ़ेद फिटकरी ६ ग्राम + इसी तरह फ़ुलाया हुआ सुहागा ६ ग्राम + बबूल का गोंद ६ ग्राम इन सब औषधियों को बारीक पीस लें और धतूरे के पत्तों के रस से गीला करके उड़द के दाने के (१२५ मिलीग्राम) बराबर गोलियां बना लीजिए। इस गोली को दिन में केवल एक बार गर्म जल से लीजिये दोपहर का भोजन करने के बाद ही लें काली पेट दवा हरगिज न लें।
वातगजांकुश रस १ गोली दिन में दो बार सुबह-शाम दशमूल क्वाथ के दो चम्मच के साथ लें।
३. आभादि गुग्गुलु १ गोली दिन में दो बार सुबह-शाम रास्नादि क्वाथ के दो चम्मच के साथ लें।
४. महामाष तेल की तीन-तीन बूंदे दोनो कानों व नाक में सुबह-शाम डालिये।
तीखे भोजन से सख्त परहेज करिये। आपकी समस्या मात्र एक माह में किधर गायब हो जाएगी आपको आश्चर्य होगा और पहले ही दिन से लाभ प्रतीत होन लगेगा।


मेनोपाज़(menopause) की स्थिति से गुजर रही हूं

डियर डाक्टर रूपेश
मैं इस समय मेनोपाज़(menopause) की स्थिति से गुजर रही हूं। मासिक धर्म अनियमित हो चला है और धीरे-धीरे करके कुछ समय में बंद हो जाएगा। मैं मानसिक तौर पर तो जरा भी डिस्टर्ब नहीं हूं पर कमर, घुटनों में बहुत तेज़ दर्द होता रहता है मैं एलोपैथी की दवाएं नहीं खाना चाहती हूं। मैं इकहरे शरीर की हूं। कुछ कमजोरी भी प्रतीत होती है। क्या इस उमर में कुछ वजन बढ़ाया जा सकता है? आयुर्वेद से कुछ बताइये।
रजनी चंद्रा,बिजनौर
रजनी बहन,आप परेशान न हों, आपको ऐलोपैथी की दवाएं नहीं खाना पडे़गी। आप इस योग को लीजिये-
अश्वगंधा चूर्ण १०० ग्राम + मेथीदाना पीसा हुआ १०० ग्राम + सोंठ २५ ग्राम + विधारा चूर्ण १०० ग्राम ; इन सबको बारीक करके शीशी में भर कर रख लें और सुबह नाश्ते के बाद व शाम को चाय के बाद एक चम्मच इस मिश्रण को हलके गर्म पानी से लीजिये। यकीन मानिये कि यदि आप इसका सेवन तीन माह तक कर लेती हैं तो आपके रजोसमाप्ति से संबंधित परेशानियां से खत्म हो ही जाएंगी साथ ही जो दर्द है वह गायब हो जाएगा और आपका वजन भी बढ़ेगा। यह अत्यंत लाभदायक योग है आप अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी इसका लाभ लेने के लिये सुझा सकती हैं।

मेनोपाज़(menopause) की स्थिति से गुजर रही हूं

डियर डाक्टर रूपेश
मैं इस समय मेनोपाज़(menopause) की स्थिति से गुजर रही हूं। मासिक धर्म अनियमित हो चला है और धीरे-धीरे करके कुछ समय में बंद हो जाएगा। मैं मानसिक तौर पर तो जरा भी डिस्टर्ब नहीं हूं पर कमर, घुटनों में बहुत तेज़ दर्द होता रहता है मैं एलोपैथी की दवाएं नहीं खाना चाहती हूं। मैं इकहरे शरीर की हूं। कुछ कमजोरी भी प्रतीत होती है। क्या इस उमर में कुछ वजन बढ़ाया जा सकता है? आयुर्वेद से कुछ बताइये।
रजनी चंद्रा,बिजनौर
रजनी बहन,आप परेशान न हों, आपको ऐलोपैथी की दवाएं नहीं खाना पडे़गी। आप इस योग को लीजिये-
अश्वगंधा चूर्ण १०० ग्राम + मेथीदाना पीसा हुआ १०० ग्राम + सोंठ २५ ग्राम + विधारा चूर्ण १०० ग्राम ; इन सबको बारीक करके शीशी में भर कर रख लें और सुबह नाश्ते के बाद व शाम को चाय के बाद एक चम्मच इस मिश्रण को हलके गर्म पानी से लीजिये। यकीन मानिये कि यदि आप इसका सेवन तीन माह तक कर लेती हैं तो आपके रजोसमाप्ति से संबंधित परेशानियां से खत्म हो ही जाएंगी साथ ही जो दर्द है वह गायब हो जाएगा और आपका वजन भी बढ़ेगा। यह अत्यंत लाभदायक योग है आप अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी इसका लाभ लेने के लिये सुझा सकती हैं।

हाथों और पैरों के जोड़ों में सूजन व तेज चुभने जैसा दर्द …….

सर नमस्कार
मेरी माता जी की उम्र ५२ साल है उन्हें हाथों और पैरों के जोड़ों में सूजन व तेज चुभने जैसा दर्द होता रहता है। इस बीमारी के कारण उन्हें चलने तक में बहुत दिक्कत होती है। ये बीमारी लगभग सात-आठ साल से उन्हें परेशान कर रही है। कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये
समीर पंडा,भुवनेश्वर
समीर जी, आपने अपनी माता जी की तमाम रिपोर्ट्स भेजी हैं उन्हें देख कर बीमारी को अच्छे तरीके से समझने के बाद मैं इस नतीजे पर हूं कि आप उन्हें निम्न दवाएं दीजिये-
१ . कैशोर गुग्गुलु २ गोली + पुनर्नवा गुग्गुलु २ गोली + गोक्षुरादि गुग्गुलु २ गोली ; इन सब गोलियों को पीस लें व ऐसी एक खुराक बनाएं। इस तरह की मिश्रित दवा की खुराक को दिन में तीन बार शहद के साथ चटाइये। माताजी को यह दवा कम से कम तीन माह तक लेना होगा।

पटाखों के धुंए से भयंकर परेशानी होती है

डा.साहब प्रणाम,मेरी बेटी १३ साल की है और जब भी दीवाली का त्योहार आता है तो सारी दुनिया खुश होती है लेकिन जब भी दीवाली का त्योहार आता है मेरी इकलौती बेटी को बहुत कष्ट हो जाता है। उसे पटाखों के धुंए से भयंकर परेशानी होती है, उसे दमा जैसा दौरा पड़ने लगता है और खांसी आती है, नाक बहने लगती है, पसलियों में दर्द और बुखार हो जाता है यानि कि हर बार दीवाली के अगले दिन ही हमें अस्पताल भागना पड़ता है जिस कारण हमारे लिये ये त्योहार बुरे सपने जैसा लगता है। यदि हम किसी को पटाखे चलाने से रोकूं तो लोग कहेंगे कि मैं परंपराओं का विरोध कर रहा हूं हमारा दुःख कोई नहीं समझता है। मेहरबानी करके आप हमारी मदद करें और हमारी बेटी को इस परेशानी से मुक्त कराएं।
संजय जागीरदार,दमण
संजय जी, मैं आपकी परेशानी को समझ रहा हूं । लोग परंपराओं के नाम पर आजकल त्योहारों पर जो कुछ भी करते हैं वह भले ही आपके लिये कष्टप्रद है किंतु आप किस किस को समझाएंगे, मेरी भी यही पीड़ा है। खैर आप अब चिन्ता न करें आप अपनी बेटी के लिये निम्न दवाएं ले आइये अस्पताल जाने की स्थिति हरगिज न आयेगी और यदि आपने छह माद लगातार दवाएं दी तो अगली दीवाली पर आपको परेशानी न होगी।
१ . दशमूल का क्वाथ सुबह – शाम एक-एक चम्मच दें।
२ . दो चुटकी हरड़ का चूर्ण चटा कर ऊपर से अगस्त्य हरीतकी अवलेह एक-एक चम्मच चटाइये।
३ . आधा ग्राम समशर्कर चूर्ण सुबह-शाम चाटने को दें।
इन दवाओं को आज ही ले आइये ताकि बच्ची को तकलीफ़ न हो और दीवाली का पर्व सुख से बीते।

ढेर सारी बीमारियां एक साथ हैं ऐसा लगता है…….

डा. साहब आपके बारे में भड़ास से पता चला था। मै भड़ास का नियमित पाठक और कभी कभी लिख भी लेता हूँ। आपसे कुछ अपनी पत्नी (आयु 39 साल) के बारे चिकित्सीय राय लेना चाहता हूँ। मेरी पत्नी को निम्न परेशानियाँ रहती हैः-1. सुबह तथा रात लेटते ही पिण्डिलियों में दर्द रहता है।2. सुबह तलुओं में दर्द होता है।3. घुटने में अक्सर दर्द रहता है।4. पेड़ू (lower abdomen) आगे की तरफ काफी निकल रहा है।5. सिर के पिछले भाग में अक्सर दर्द रहता है।6. गले में खराश रहती है परन्तु कफ नहीं निकलता है।7. खाँसी रहती है।8. कमर में दर्द रहता है।9. माहवारी लगभग 24-25 दिन पर होती है तथा 2-3 दिन तक रहती है वहाव भी काफी कम होता है।10. सुबह-सुबह काफी डकार आती है।11. सोते-सोते अक्सर हथेलियाँ अकड़ जाती हैं।12. सोने मे अक्सर ऐसा महसूस होता जैसे किसी ने दाब लिया हो।13. भीड़-भाड़ वाली जगह पर एकदम बहुत तेज हाजत महसूस होती तथा उस समय गुदा मार्ग में काफी जलन होती है।14. पैरो में दवाने पर गड्डे पड़ जाते है।आशा है आप उचित मार्गदर्शन करेगें।प्रतीक्षा में(अजीत कुमार मिश्रा)
अजीत भाईसाहब,आपने जो लक्षण लिखें हैं उनसे स्पष्ट पता चलता है कि ये लक्षण अचानक नहीं उपजे हैं और न ही ऐसा होगा कि आपने इनका उपचार न कराया हो क्योंकि जितने कुछ आप लिख रहे हैं वह दर्शाता है कि देह में वात का विकार है जिसमें कि अपान वायु के दोष की प्रबलता है और साथ ही कफ का आवरण भी है। इन लक्षणों के साथ ही उनकी भोजन के प्रति रुचि तथा पाचन भी सही न होगा जिसके बारे में आप कदाचित बताना भूल गए। इन सभी लक्षणों को मिला कर आप आधुनिक चिकित्सा के अनुसार किसी एक रोग का नाम नहीं दे सकते अतः एलोपैथी में उपचार संभव भी नहीं है। आप उन्हें पहले एक दिन सुबह नित्यकर्म से फ़ारिग होने के बाद नारियल का तेल तीन चाय के चम्मच यानि अनुमानतः तीस मिली. नाश्ते के स्थान पर दें और दिन में कुछ भी खाने को न दें यानि एक दिन मात्र इसी पर गुजारा करना है। अगले दिन सुबह इसी प्रकार मंजन से पहले हल्के गर्म जल में नमक मिला कर जितना अधिक पी सकें रख लीजिये व पिला दीजिये ताकि आसानी से मुंह में उंगली डालते ही उल्टी हो जाए व जो दोष पेट में संचित हों वे निकल जाएं। इसके बाद नाश्ते में दलिया अथवा साबूदाना दें और दोपहर में यधि भोजन करें तो इसी तरह से हल्का आहार लें। ध्यान रखिये कि चाय, काफ़ी,डबलरोटी, बिस्किट, बासी भोजन, दूसरे टाइम का रखा हुआ चावल,दही, मटर,गोभी,सभी प्रकार की खटाई, घुईंया(अरबी),भिण्डी, केला,सारे शीतल पेय तथा बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स आदि से सख्त परहेज रखिये। अब उन्हें अगले दिन से सामान्य आहार देना प्रारंभ करें तथा निम्न उपचार दें–
१ . नई इमली का गूदा व भिलावा(इसे मराठी में बिबवा और कई स्थानों पर भल्लातक कहते हैं) शुद्ध बराबर मात्रा में लेकर कूट लें ब २५० मिग्रा. वजन की गोलियां बना कर सुखा लें। एक-एक गोली दिन में तीन बार मट्ठे से दीजिये मट्ठा उपलब्ध न होने पर जल से दें। यदि इस औषदि को एक सप्ताह तक लगातार लेते हैं तो फिर तीन दिन के लिये बंद कर दें व ध्यान रखें कि जिस दिन दवा देने में विराम दे रहे हों उस दिन उन्हें नारियल की कच्ची गरी का लगभग १०० ग्राम सेवन अवश्य कराएं यह आप दिन में थोड़ा-थोड़ा करके करा सकते हैं,दूसरे व तीसरे दिन कोई आवश्यक नहीं है।
२ . कच्ची हरी हल्दी एक किलो छील कर कद्दूकस में घिस लें व ५०० ग्राम शुद्ध गाय के घी में भून लें + घी में भुना आधा किलो गेहूं का आटा जैसे कि हलुआ बनाने से पहले भूनते हैं + तगर ५०० ग्राम + बादाम की मींगी ५० ग्राम + चिरोंजी ५० ग्राम + अश्वगंध ५० ग्राम + सोंठ घी में भुनी ५० ग्राम; इन सबको घी से मिला कर लगभग एक छटांक वजन के लड्डू बना लें व एक-एक लड्डू सुबह शाम गर्म दूध से दें।
३ . सुबह निहारे मुंह एक चम्मच एलोवेरा का गूदा खिलाएं, पंद्रह दिन तक देने के बाद एक सप्ताह तक बंद कर दें।
४ . दशमूल क्वाथ एक-एक चम्मच दिन में तीन बार दें।
इस उपचार को दो माह तक लगातार दें, आशातीत लाभ होगा।

मुझे बताया कि स्टमक में घाव हैं,आपरेशन न करवाना पड़े…..

डाक्टर साहब,मेरी उम्र पैंतालीस साल है, पिछले एक माह से मुझे epigastrium के पास तीखा सा दर्द होता है जो कि कभी तो रहता है और कभी गायब हो जाता है। यह दर्द एक ही जगह पर रहता है, विशेष तौर पर भोजन के बाद १५ मिनट से २ घंटे तक दर्द बढ़ता रहता है अगर कुछ कठोर सा खाना जैसे कि रोटी आदि खाया तो ज्यादा दर्द हो जाता है और यदि सत्तू या जूस वगैरह लिया तो कम रहता है। कभी कभी उलटी हो जाने पर दर खत्म हो जाता है, दर्द के साथ जलन सी भी महसूस होती है। भूख तो लगती है लेकिन ज्यादा खाने की हिम्मत नहीं होती है। कमजोरी आती जा रही है। पेट के बीचोबीच में यदि डाक्टर ने दबा कर देखा तो बहुत तेज दर्द होता है, यहां के डाक्टर ने टैस्ट के बाद मुझे बताया कि स्टमक में घाव हैं। आप कोई ऐसी दवा बताईये कि मुझे आपरेशन न करवाना पड़े, मुझे आपरेशन के बारे में सोच कर ही भय लगता है और वो भी पेट का आपरेशन तो और भी भयंकर होगा। मेरी मदद करिये।
राज अवस्थी, बरुआसागर
राज भाईसाहब आपको आपरेशन करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी इस लिये भयभीत न हों। यदि आपके आमाशय में घव है तो ये कोई जानलेवा या लाइलाज बीमारी नहीं है बस होता ये है कि आप पेट के असहनीय दर्द से घबरा जाते हैं। अब आप निम्न औषधियों को नियम से लीजिये और चिंतामुक्त हो जाइये साथ ही दर्द से भी मुक्ति मिल जाएगी, इस उपचार से किसी भी कारण हुआ आमाशय घाव या व्रण भर जाएगा और उसके बनने का कार्ण भी समाप्त हो जाएगा। बस ध्यान रखिये कि आपका भोजन कम से कम पंद्रह दिन तक तरल हो ठोस आहार न लें बस पंद्रह दिन की ही तो बात है फिर उसके बाद धीरे-धीरे हल्का भोजन लेना शुरू करियेगा। दूध और घी ले सकते हैं,शहद लीजिये,अण्डे यदि खाते हों तो ले सकते हैं पर एक से ज्यादा नहीं वो भी दूध में घोल कर लें। गर्म दूध न लें हानिकारक है इस लिये ठण्डा किया हुआ दूध लेना हितकर है। बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स हर्गिज़ न लें।
१ . पहले चार दिन तक सुबह-दोपहर-शाम-रात को ये दवा लें — सर्वांगसुन्दर रस ४ रत्ती + मण्डूर भस्म ४ रत्ती + शुक्ति भस्म ४ रत्ती मिला लें व ये हो गई आपकी एक दिन की खुराक जिसे चार बराबर हिस्सों में करके एक माशा सौंफ़ के चूर्ण+ भुना जीरा का चूर्ण ४ रत्ती के साथ मिला कर आपको शहद के साथ चाटना है। भोजन के बाद कुमार्यासव नं. १ दो चम्मच पियें ।
२ . चार दिन बाद पांचवे दिन से दवा परिवर्तित करिये व ये दवा लेना शुरू करें — सूतशेखर रस(साधारण) २५० मिग्रा. + कामदुधा रस(साधारण) ५०० मिग्रा. + यशद भस्म १०० मिग्रा. + जहरमोहरा पिष्टी २५० मिग्रा. + आमलकी रसायन ५०० मिग्रा. + शंख भस्म २५० मिग्रा. + मुक्ताशुक्ति पिष्टी २५० मिग्रा. + प्रवाल पंचामृत(मुक्ता युक्त) ५० मिग्रा. ; इस पूरी दवा की एक खुराक करें व इसे सुबह दोपहर शाम को तीन बार शहद के साथ लीजिये और इसके दस मिनट बाद जीरा जल पी लीजिये। जीरा जल बनाने के लिये तीन ग्राम जीरा लेकर बारीक पीसिये और लगभग १०० मिली जल में डाल कर दस मिनट के लिये रख दीजिये तथा फिर पतले कपड़े से छान लीजिये बस हो गया आपका जीरा जल तैयार, अब आप इसका सेवन कर सकते हैं परंतु हर बार ताजा ही बनाएं।
इस औषधि व्यवस्था को दो माह तक प्रयोग और यकीन करिये कि आपकी बीमारी ठीक हो जाएगी अगर प्रतीत हो तो दो माह और इस्तेमाल कर लीजिये लम्बे समय तक भी यदि आप दवाएं लें नुकसान नहीं होगा

दोनो अंडकोषों में तीन या चार गुना अंतर है…

mera baanya andkosh danye kee apeksha teen se char guna bada hai. pichle kareeb pandrah sal se. haan dard nahi karta hai. kabhi jyada phool jata hai. kai ayurvedic aur homeopathic dava le chuka hoo. chandraprabhavati aur vridhivadhikavati se kam to ho jata hai. par usi avastha mein rahta hahin hai. kripa karke ilaz batayen, operation se dar lagta hai. meri umar 30 sal ke karib hai. shaadi nahee hui hai.
manoj kumar
मनोज भाई,आपकी समस्या पुरानी है किन्तु निराश न हों। जैसा कि आपने बताया कि आप चंद्रप्रभा वटी और वृद्धिबाधिका बटी ले लेने से आपको आराम आ जाता है किन्तु उसी अवस्था में रह जाता है। दोनो अंडकोषों में तीन या चार गुना अंतर परेशानी पैदा करता है स्वाभाविक सी बात है कि यदि दर्द न भी हो तब भी ये एक परेशानी वाली बात है। आप के लिये जो उपचार लिख रहा हूं वह आप नियमित रूप से न्यूनतम छह माह तक लें और विश्वास रखिये कि आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी–
१ . वृद्धिबाधिका बटी एक गोली + वृद्धिहर रस एक गोली सुबह शाम शहद के साथ लीजिये।
२ . छोटी हरड़ को एक दिन गोमूत्र में भिगो कर रखिये बाद में सुखा कर एरण्ड(रेंडी) के तेल में भून लीजिये व पीस कर चूर्ण बना कर चौथाई भाग सेंधा नमक मिला लीजिये। इस योग को पांच ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार भोजन के बाद गर्म जल से लीजिये।
३ . रात को सोते समय १०० ग्राम ताजे इमली के पत्ते लेकर किसी मिट्टी के बर्तन में रखें और इसमें इतना गोमूत्र डालें कि सारी पत्तियां डूब जाएं। फिर इसे आग पर पकाएं जब गोमूत्र कम हो जाएफिर उतना ही गोमूत्र डालें व पकाएं ऐसा चार बार करें। ध्यान दीजिये कि यदि अंडकोष कद्दू की तरह से भी भारी हों तो इस योग से समस्या समाप्त हो जाती है ऐसी स्थिति में बर्तन से उठती भाप से सेंक लीजिये। जब योग पूरा हो जाए तो उसे हलका सा गर्म ही अंडकोष पर बांधें। इस योग में कदाचित आप को अड़चन हो सकती है किन्तु यदि आप आपरेशन से बचना चाहते हैं तो ये बेहतरीन उपाय है।

दायें अंडकोष में सूजन और दर्द

प्रणाम डॉक्‍टर साहब, सर्वप्रथम तो आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जो आपने मेरी समस्‍या पर इतनी तत्‍परता से प्रतिक्रिया दी. आपको मैं थोड़े से विस्‍तार से पूरी बात बता देता हूं. सबसे पहले तो मेरी उम्र 24 वर्ष है और मैं अविवाहित हूं. सन् 2005 मार्च महीने में मैं जिम जाया करता था कसरत करने के लिए तभी से एक दिन मेरे दायें अंडकोष में सूजन और दर्द शुरू हुआ. मतलब तब मेरी उम्र 21 होगी. हफ्ते भर मैंने कोई उपचार नहीं लिया और दर्द असहनीय होता गया. जहां तक चोट लगने की बात है ऐसा कुछ नहीं हुआ था. मैं सुबह जिम जाने से पहले बहुत सारा पानी पीता था फ्रेश होने के लिए और जिम के दौरान पेशाब का प्रेशर बनने और उसे रोके रखना भी कारण हो सकता है. हालांकि कारण क्‍या है मैं स्‍पष्‍ट रूप से नहीं कह सकता. खैर एक-दो हफ्ते बाद मैं एक फिजीशियन और उसके बाद सर्जन के यहां गया. दोनों ने कहा कि कुछ नहीं है और दवाएं देकर टरका दिया. कोई लाभ नहीं. मैं मुरैना मध्‍यप्रदेश में रहता हूं उसके बाद ग्‍वालियर के सर्जन को दिखाया उन्‍होंने अल्‍ट्रासाउंड कराया. जिसमें दायें अंडकोष का आकार बढ़ा होने के अलावा कोई समस्‍या नहीं थी. सब नॉर्मल था. उन्‍होंने भी दवाएं देकर टरकाया. कुछ खास फायदा नहीं. उसके बाद काफी महीनों तक वहीं के एक आयुर्वेदाचार्य से उपचार लेता रहा. बहुत लाभ हुआ. दर्द लगभग खतम सा हो गया. सूजन भी कुछ खास नहीं दिखी. फिर 2006 में मेरे बायी तरफ के लोअर अब्‍डोमेन में दर्द रहने लगा. दरअसल उनकी सलाह पर मैंने लंगोट पहनना शुरू किया था और एक मौके पर मैंने कमर पर लंगोट बहुत ही ज्‍यादा कस लिया था. उस दिन के बाद मेरे बायीं लोअर अब्‍डोमेन में दर्द रहने लगा. मामूली बहुत ज्‍यादा नहीं. बस टाइट पैंट पहनने या बेल्‍ट लगाने पर वो बढ़ जाता है और शरीर के पूरी बायें हिस्‍से में होने लगता है मतलब बायें तलवे से लेकर और ऊपर सिर तक हाथ तक. मैंने उन्‍हें बताया तो वे टहलाते रहे. सो मैंने उनके यहां जाना बंद कर दिया. एक सर्जन के यहां गया तो उन्‍होंने अल्‍ट्रासाउंड कराकर सब कुछ नॉर्मल बताकर कह दिया कि यह सब तो तुम्‍हारा वहम है. उसके बाद 6 महीने तक कोई दवा नहीं ली और काफी डिप्रेशन में चला गया. फिर 2007 की शुरूआत में मेडिकल कॉलेज ग्‍वालियर के एक जूनियर डॉक्‍टर मित्र के कहने पर कुछ सर्जन और फिजीशियन को दिखाया और उन्‍होंने कहा तुम्‍हें कोई बीमारी ही नहीं है. बस अंडकोष का आकार थोड़ा बड़ा है तो कभी कभार कुछ लोगों का होता ही है. उसके बाद काफी समय तक कोई दवा नहीं. फिर एक होम्‍योपैथी के चिकित्‍सक को दिखाया. तब से अब तक उनकी दवाएं ले रहा था. 15 दिन पहले तक. पर आठ महीने दवा लेने के बावजूद फर्क तो दिखा पर अपेक्षित फर्क नहीं दिखा ऊपर से चिकित्‍सक महोदय का कहना था कि मैं कह नहीं सकता कि इलाज कब तक चलेगा. मतलब इलाज सालों भी चल सकता है उनके अनुसार. होम्‍योपैथी लेने से पहले मैं न तो मोटरसायकल, स्‍कूटर में किक मार सकता था क्‍योंकि इससे असहनीय दर्द होता था. ना वजन उठा सकता था, दौड़ने से भी बेहद कष्‍ट होता था, थोड़ा भी पेशाब रोकने से दर्द शुरू हो जाता था, सर्दियों के दौरान तकलीफ बढ़ जाती थी अंडकोष की. मतलब ठंडे पानी को छू लेने या शौच के लिए जाने के बाद अंडकोष में असहनीय दर्द होता था. डिस्‍चार्ज के बाद भी दर्द होता था. हालांकि अब इतने समय होम्‍योपैथी लेने के बाद इन सब कार्यों को करने के बावजूद दर्द उतना भयंकर नहीं होता. उन चिकित्‍सक ने मुझे सब कुछ करने की छूट दे रखी थी चो बाइक चलाओ चाहे वजन उठाओ, चाहे masturbation करो. हालांकि अभी मैं यदि masturbation करूं तो स्थिति ये है कि उसके बाद दर्द शुरू हो जाता है और कुछ दिन तक होता रहता है. इस बार होम्‍योपैथी लेने के कारण सर्दियों में भी काफी कम तकलीफ हुई. मोटरसायकल चलाऊं तो दर्द होता है. पर मैं होम्‍योपैथ की अत्‍यधिक धीमी गति से उपचार से परेशान हो गया था और यह बहुत महंगा भी था. फिलहाल मेरे दायें अंडकोष में दर्द, सूजन दोनों है. दर्द ना तो असहनीय है ना ही बहुत कम है. दर्द पूरे दाहिने पैर में होता है और भारीपन महसूस होता है. दर्द जब कम रहता है तो केवल अंडकोष तक ही होता है टांग में नहीं महसूस होता. और बायें लोअर अब्‍डोमेन की समस्‍या यथावत है. हालांकि बहुत से लोगों ने इसे नर्वस सिस्‍टम की समस्‍या बताया. पर वहां दर्द नहीं है वो तो कभी कभार तंग पैंट पहनने या गलती से दौड़ने पर होता है. वहां भी ऐसा है कि दर्द यदि ज्‍यादा हुआ तो शरीर के पूरे बायें हिस्‍से में होता है सिर तक. हालांकि दर्द ज्‍यादा, या फिर होता ही नहीं है. समस्‍या तो मुख्‍यतया अंडकोष की ही है. पिछले महीने अप्रैल में जो अल्‍ट्रासाउंड कराया उसकी रिपोर्ट ये है- बाकी सब तो नॉर्मल है. both testis shows normal echo pattern.Rt testis is larger in size measRt testis 37*20mm Lt testis 27*14mmRt testis shows increased vascul;arity on color flow.ये तो रही रिपोर्ट हालांकि जब रिपोर्ट कराई थी उसके बाद अब लगता है कि थोड़ी सूजन ज्‍यादा है क्‍योंकि हर समय दौड़-भाग करने, बाइक चलाने और अनियमित दिनचर्या के कारण हो सकता है. अब मैंने स्‍वामी रामदेव का प्राणायाम शुरू किया है उसको करने के बाद दर्द में राहत महसूस करता हूं. हालांकि ग्‍वालियर में हफ्तेभर पहले स्‍वामी रामदेव के पतंजलि योग चिकित्‍सालय भी गया था पर उन्‍होंने कहा कि आप तो बिल्‍कुल ठीक हैं. डॉक्‍टसाहब अब आपसे विनती है कि मेरी समस्‍या को दृष्टिगत रखते हुए समुचित उपचार बतायें. क्‍या इस समस्‍या का समाधान संभव है और यदि हां तो ये कितना समय लेगा. चूंकि मेरा विवाह भी आगामी साल-छ: महीनों में हो सकता है. जरूरी प्रीकॉशन(सावधानियां) और परहेज भी बतावें और समुचित मार्गदर्शन दें. मेल कुछ ज्‍यादा ही लंबा हो गया है. इसके लिए क्षमा चाहता हूं. आभार, अनिल,मध्यप्रदेश
अनिल भाई,आपकी समस्या को गौर से देखा विस्तार से लिखा इसके लिये मैं आपका धन्यवाद करता हूं। आपकी समस्या कोई बहुत बड़ी या लाइलाज तो है नहीं बस होता यह है कि अनियमित दिनचर्या और आचरण के कारण रुग्ण्ता उपजती है। आपको एक बात बहुत ही स्पष्टता से बता देना चाहता हूं कि चाहे आपने कितने भी तथ्यों और तर्कों से अपने आपको हस्थमैथुन के पक्ष में समझा रखा हो और मन को ये बता-जता कर कि ये तो एक सहज साधारण क्रिया है किन्तु आपके लिये ये बेहद हानिकारक है। शेष निर्णय आपको लेना है। आप उस इत्र का व्यवसाय करने वाले को क्या कहेंगे जो कि लाखों फूलों का इत्र खींच कर नाली में बहा दे? मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं क्योंकि सबके पास तर्क हैं पक्ष और विपक्ष में। जैसी इस समय आपकी स्थिति है ये ठीक वैसी ही है जैसा कि घायल घोड़ा हो और आप उसे चाबुक मार मार कर दौड़ाएं, आप हस्थमैथुन से उस समय तो अपनी कामेच्छा पूर्ण कर लेते हैं लेकिन भविष्य के बारे में क्या फिर जीवन भर डाक्टरों के भरोसे ही रहने का इरादा बनाया हुआ है। इससे अधिक समझाना व्यर्थ है आप अपना भला बुरा स्वयं समझते हैं। इन औषधियों को न्यूनतम चार माह तक नियमित सेवन करें आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी—
१ . वृद्धिबाधिका बटी दो -दो गोली + शूल वर्जिणी बटी एक गोली दिन में दो बार नाश्ते और रात्रि के भोजन के बाद जल से लीजिये।
२ . गोक्षुरादि गुग्गुलु दो गोली + लोकनाथ रस एक गोली + त्रिबंग भस्म २५० मिग्रा. + शुभ्रा भस्म २५० मिग्रा. + पुनर्नवा मण्डूर २५० मिग्रा. इन सबको इसी अनुपात में मिला कर एक खुराक बनाएं। इस खुराक को दिन में तीन बार हलके गर्म जल से लीजिये।
३ . शोथहर गुटिका को पत्थर पर दिन एक बार घिस कर लेप करे और लंगोट को कस न बांधें। रात्रि को सोते समय महानारायण तेल लगा कर सोएं व यदि संभव हो तो हल्का सा सेंक लिया करें इससे शीघ्र लाभ होगा किन्तु ध्यान रहे कि सेंक हलकी आंच की हो तेज आंच आपको भयंकर हानि पहुंचाएगी।
तेज़ मिर्च-मसालेदार भोजन तथा खट्टे पदार्थों से परहेज़ करना हितकर है। आप शीघ्रातिशीघ्र स्वस्थ हो जाएं व सुखपूर्वक विवाहित जीवन के दायित्त्वों का निर्वाह करें ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है।

दांयी किडनी में ४-५ मिमी. की पथरी है

डॉक्टर साहब,मेरी दांयी किडनी में ४X५ मिमी. की पथरी है जिसके कारण बहुत दर्द होता रह्ता है दर्द कभी तेज और कही धीमा रहता है किन्तु बंद नहीं होता। कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये।
सतीश कुमार जी
सतीश भाई,पहले तो माफ़ी चाहता हूं कि आपको भाषा की समस्या में उलझा दिया लेकिन मेरी भी मजबूरी आप समझ सकते हैं कि मेरे पास समय का सर्वथा अभाव रहता है काम इतना अधिक हो जाता है। अब आपकी दवा आपको बताता हूं
१ . कलमी शोरा(ये आपको पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल जाने वाली चीज है जो देखने में दानेदार बारीक नमक जैसी दिखती है और स्वाद में नमकीन और ठंडी सी महसूस होती है)आधा- आधा ग्राम की मात्रा में सुबह शाम लेकर पुनर्नवादि कषाय के दो चम्मच के साथ ले लीजिये।
२ . यदि कलमी शोरा न मिले तो हजरुल यहूद भस्म को इसी तरह से सेवन करें, ये आपको आयुर्वेदिक दवा विक्रेता के पास से मिल जाएगी।
३ . एक वनस्पति जिसे लोग अजूबा,पानफुटी,पत्थर फोड़ी,दर्दमार या पर्णबीज नाम से जानते हैं अगर मिल जाती है तो उसके दो पत्ते पानी में उबाल कर सुबह शाम पीजिये आपकी पथरी कब घुल कर निकल गयी आपको पता ही नहीं चलेगा। इस पौधे के पत्तों में से किनारे से छोटे-छोटे नये पौधे निकल आते हैं इसे बगीचों में शोभा के लिये लगाया जाता है।
वैसे तो पहली दवा ही जादू कर देती है। मांस, मछली, अंडा, मिर्च-मसालेदार आहार से परहेज रखें, पानी ज्यादा पियें और हल्का भोजन किया करें,समय हो तो सुबह-शाम घूमा टहला करें। शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएंगें।

जोडों में सूजन है व चुभन जैसा दर्द होता है….

डा.साहब प्रणाम,पिछले दो माह से मेरे शरीर के लगभग सभी जोडों में सूजन है व चुभन जैसा दर्द होता है, चलते-फिरते नहीं बनता, खड़े होने तथा बिस्तर पर लेटने की स्थिति में पीड़ा जारी रहती है,सूजे हुए स्थान पर ऐसा लगता है कि बिच्छू ने डंक मार दिया है, मुंह से बदबू आती रहती है चाहे कितना भी अच्छा टूथपेस्ट क्यों न इस्तेमाल करूं, भोजन करने का मन ही नहीं करता है, मुंह में हमेशा लार सी बनती रहती है, शुरू में करीब बीस दिन तक तो हलका स बुखार रहता था जो कि एलोपैथिक दवा से ठीक हो गया लेकिन ये समस्या खत्म नहीं हो रही है। मेरी कपड़े की दुकान है तो दिन भर बैठा रहना होता है, व्यायाम के लिये समय ही नहीं मिल पाता है, क्भी-कभी बदन पर खुजली भी होती है। मुझे समझ में ही नहीं आ रहा कि मुझे ये क्या हो रहा है? मेहरबानी करके कोई उपाय बताइये।
राजेन्द्र मेहता,राजकोट
मेहता जी, आपकी बीमारी का कारण है आपका ऐसा आहार-विहार जिसमें कि शारीरिक श्रम शामिल नहीं है और आप व्यायाम भी नहीं करते हैं। आपको हुई बीमारी का नाम है “आमवात”। सबसे पहले आपके शरीर की शुद्धि के लिये लंघन, स्वेदन एवं विरेचन कराना होगा। पहले आप एक या दो दिन क्षमतानुसार उपवास करिये,दिन में बस दो चार फल खाइये; कोष्ठबद्धता दूर करने के लिये आप रात को एक गिलास हल्के गुनगुने मीठे दूध में दो चम्मच एरण्ड का तेल(castor oil) मिला कर पी लें जिससे कि सुबह दो-चार दस्त आकर पेट साफ हो जाएगा। स्वेदन के लिये रेत या बालू, राई, एरण्ड बीज, सैंधा नमक, इनकी पोटली बना कर गरम तवे पर रखें व सुहाता-सुहाता सा सेंक करें ध्यान रखिये कि ज्यादा गर्म न हो; हाथ, पैर, उंगली, कंधे, कमर सब जगह सेंक करें। वातवर्धक आहार से बचें, अरबी(घुइयां),आलू, गोभी, भिण्डी का सेवन न करें। पुराने गेंहू की रोटियां, मूंग की दाल, करेला, परवल, लहसुन, मेथी, चौलाई, बथुआ खाएं व दूध में सोंठ का चूर्ण मिला कर पिया करें। निम्न औषधियां लें—
१ . अग्नितुण्डी बटी १ गोली + शंख भस्म दो चुटकी + साथ लेकर दो चम्मच दशमूलारिष्ट के साथ लीजिये दिन में दो बार भोजन के बाद।
२ . महायोगराज गुग्गुलु २ गोली दिन में दो बार महारास्नादि काढ़े के साथ लीजिये।
३ . आमवातारि रस १ + त्र्योदशांग गुग्गुलु १ गोली दिन में तीन बार अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये।
इस पूरे औषधिक्रम को लगातार दो माह तक लीजिये तथा भले ही दुकान तक पैदल जाएं अपने स्वास्थ्य के लिये इतना तो व्यायाम के तौर पर करिये ही अन्यथा दवाएं बंद करने पर पुनः रोग के लक्षण वापस आ सकते हैं। यदि औषधियों के संबंध में संबंधी कोई जानकारी लेनी हो तो निःसंकोच मुझे ई-मेल करें।

किडनी में पथरी है….

आदरणीय डा.रूपेश, नमस्कार; मेरे भाई की उम्र बीस साल है आज उसे बैडमिंटन खेलते-खेलते अचानक कमर में दर्द शुरू हुआ जो कि नीचे अण्डकोशों तक फैल गया है। कभी कभी वो दर्द से कराह उठता है, एक बार उल्टी भी हो चुकी है किन्तु इससे कोई अंतर नहीं पड़ा। नाभि के पास के क्षेत्र में कुछ भारीपन की शिकायत कर रहा है। चलने-फिरने की कोशिश से दर्द की लहर सी उठ जाती है लेकिन अगर एक ही स्थिति में रहा जाए तो कुछ देर में दर्द कम होते-होते बंद हो जाता है। कोई तत्काल आराम देने वाला उपचार बताएं बड़ा कष्ट है और ऐसा क्यों हुआ है। हम लोग मांसाहारी भोजन भी करते हैं, भाई को कोई व्यसन नहीं है।
रविकांत रायकवार,झांसी(उ.प्र.)
रविकांत जी,आपने जो पिछले माह करवाई मूत्र की रिपोर्ट भेजी है उसमें मूत्र में रेड सेल्स, पस सेल्स व प्रोटीन की उपस्थिति है। आपके भाई को दरअसल किडनी में पथरी है जो कि खेलने के फ़ौरान अपने मूल स्थान से च्युत हो गयी है जिस कारण इतना तेज दर्द शुरू हो गया है। चिंतित न हों कल सुबह ही नीचे लिखी दवाएं उन्हें दीजिये और तत्काल दर्द निवारण के लिये उन्हें जामुन के दो चम्मच सिरके में दो चुटकी खाने वाला सोडा डाल कर दे दीजिये और फिर आधे घंटे तक पानी न दें दर्द समाप्त हो जाएगा। ज्यादा हिले-डुलें न ताकि तकलीफ़ न हो।
१ . हजरुलयहूद भस्म १५ ग्राम + कलमी शोरा १५ ग्राम लेकर मिला लें व इस मिश्रण की तीस पुड़िया बना लें और सुबह शाम नारियल पानी या सादे पानी के साथ एक-एक पुड़िया लें।
२ . तारकेश्वर रस एक-एक गोली सुबह शाम वरुणादि कषाय के चार ढक्कन दवा के साथ दीजिये।
३ . गोक्षुरादि गुग्गुलु और त्रिफला गुग्गुलु दो-दो गोली सुबह-दोपहर-शाम को पानी के साथ दीजिये।
मात्र पंद्रह दिनों के भीतर अगर ईश्वर ने चाहा तो यदि ज्यादा बड़े आकार की पथरी नहीं है तो घुल कर मूत्रमार्ग से कब निकल जायेगी पता ही नहीं चलेगा। एक बात का ध्यान रखिये कि इन पंद्रह दिनों में रोगी को मांसाहार से परहेज करवाएं।

JAye to jaye Kaha
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